
Budget Wishlist : एक विकास-केन्द्रित अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में लगातार सुधारों और नवाचारों की आवश्यकता होती है और पिछले एक दशक में, इस नजरिये से केंद्रीय बजट का महत्व कम हुआ है। एक ऐसे देश के लिए जो विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है, जहाँ की जनसँख्या सबसे बड़ी वर्किंग-एज जनसंख्याओं में से एक है, जहाँ सामाजिक मेट्रिक्स में सुधार हो रहा है और प्रति व्यक्ति क्रेडिट एक्सेस कम है, वहां हमेशा से स्थायी, औपचारिक, सस्ते और सर्व समावेशी फाइनेंशियल इको सिस्टम के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पिछले बजट के बाद से फाइनेंशियल सर्विसेस कुछ सुधारों के कारण पहले से ही प्रभावित हैं, जिनमे प्रमुख हैं रेग्युलेटरी, कम्प्लाइन्स और पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) संबंधी उपाय। 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर एक राष्ट्र के लिए विकास एक निरंतर की एजेंडा रहा है। इसलिए, मेरी बजट विश लिस्ट सिर्फ बजट के दिन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह अगले कुछ महीनों तक धीरे-धीरे ज़ाहिर हो सकती है।
1. बिना किसी रोडमैप वाला व्यवधान विनाशकारी होता है: जब इरादा टुकड़ों-टुकड़ों में सुधार करने का हो तो उससे ज्यादा पीड़ादायक कुछ भी नहीं होता है। एक विकासशील क्षेत्र होने के कारण, फिनटेक अभी भी कार्य करने के तरीक़े सीख रहा है, इसलिए इसे लगातार बढ़ावा दिया जाना चाहिए। बिग पिक्चर को ध्यान में रखे बिना, किश्तों में किया जाने वाला मनमाना परिवर्तन व्यापार की निरंतरता को चोट पहुँचाता है। हालांकि मुझे यकीन है कि फिनटेक विकास पथ को गति देते समय व्यवधानों को पसंद करते हैं, लेकिन रेगुलेटरी कम्प्लाइन्स के रोडमैप के बारे में वास्तव में भारत सरकार से स्पष्टता की आवश्यकता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि, एक बार स्पष्टता देने के बाद, उसे अपनाने के लिए पर्याप्त समय भी दिया जाना चाहिए।
2. जो योग्य हो उसे इनाम मिले: यूपीआई संपर्क रहित रीयल-टाइम भुगतान के मामले में देश का स्वर्णिम मानक बन गया है। पिछले कुछ महीनों में, डिजिटल इंडिया बनने की भारत सरकार के आधारभूत संकल्प को वैश्विक मीडिया और सत्ता के गलियारों में काफी प्रसिद्धि मिली है जिसके योग्य वह है। जैसा कि सरकार विकास के अगले अध्याय के रूप में यूपीआई के वैश्विक रोल-आउट की शुरुआत कर रही है, मैं चाहता हूं कि यूपीआई को मिलने वाले इंसेंटिव लंबे समय तक जारी रहे। दूसरे शब्दों में, एक महत्वाकांक्षी योजना (पढ़ें -फिनटेक) के मुख्य कार्यकारी चैंपियन को बैंकों से प्रोत्साहन राशि और रीइम्बर्समेंट के रूप में उचित पुरस्कार दिया जाना चाहिए। यह भविष्य में और भी बड़े ज़बरदस्त साहसिक लक्ष्य को प्राप्त करने में सरकार की मदद करने के लिए भागीदारों की प्रतिबद्धता को और बढ़ाएगा। साथ ही, प्रोत्साहन राशि फिनटेक के लिए लाभप्रदता (प्रॉफिटेबिलिटी) की राह को सुगम करेगी।
3. मेक (आईटी इजी) इन इंडिया: फिनटेक के लिए अत्याधुनिक तकनीक को समझना आसान है, लेकिन इनकम टैक्स को समझना बेहद कठिन। एक भारतीय के रूप में, मुझे यह स्वीकार करते हुए गर्व हो रहा है कि “ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस” को एक स्वागत योग्य बदलाव के रूप में देखा गया है। हालाँकि, कुछ मुद्दे, मुख्य रूप से टैक्सेशन, लगातार अभिशाप बने हुए हैं। मेरी तीसरी इच्छा है – नए जमाने की कंपनियों के लिए सरल टैक्सेशन। मुझे पूरा यकीन है कि माननीय वित्त मंत्री द्वारा इन प्रश्नों पर विचार किया जाएगा कि कैसे कई टैक्सेशन को कंसोलिडेट, ऑप्टिमाईज़ या रैशनलाईज़ किया जाए। यह देखते हुए कि सेवा प्रदाताओं के लिए जीएसटी एक बड़ी लागत है, ख़ासकर जीएसटी इनपुट के अभाव में, टैक्स ब्रैकेट को कम करने की तत्काल आवश्यकता है। सेवा प्रदाताओं के लिए जीएसटी दरों में कमी का लाखों भारतीयों के लिए अफोर्डेबल फ़ाइनेन्शियल इन्क्लूजन में तेजी लाने के लिए सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मेरी विश लिस्ट को यह कहते हुए ख़त्म करूंगा कि, इन्क्लूजन तब तक नहीं प्राप्त किया जा सकता जब तक प्रोसेस को इंसेंटिवाइज़ न किया जाए। उदाहरण के लिए निवेश बाज़ार को देखें, कैसे वहाँ टैक्स इंसेंटिव और छूट का उपयोग कर एक टिकाऊ और स्केलेबल बाजार का निर्माण किया गया। छोटे उपभोक्ताओं और फैसिलिटेटर्स के क्रेडिट और इन्वेस्टमेंट चक्रों में ऐसे ही इंसेंटिव और छूट रणनीतिक रूप से लागू किये जाने चाहिए जिससे अगले दशक में भारत वाक़ई एक समावेशी और प्रमुख विकास-केन्द्रित अर्थव्यवस्था बन सके।