वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में 11 B2C सेक्टरों के वार्षिक विश्लेषण से संगठित रिटेल क्षेत्र के उपभोक्ता व्यवहार में प्रमुख पैटर्न का पता चलता है।
• उच्च सकल घरेलू उत्पाद एवं मुद्रास्फीति में नरमी से त्योहार और शादी के मौसम के कारण वित्त वर्ष 24 के तीसरी तिमाही में रिटेल खपत में वृद्धि होने की उम्मीद है।
मुंबई, 3 जनवरी, 2024: सीएमएस इन्फो सिस्टम्स ने बड़े फॉर्मेट वाले रिटेल, आभूषण, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स, आतिथ्य, और विमानन आदि जैसे 11 उपभोक्ता क्षेत्रों के व्यापक विश्लेषण के माध्यम से वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में संगठित रिटेल क्षेत्र में प्रमुख उपभोग रुझानों का खुलासा किया है।
सीएमएस द्वारा रिटेल उपभोग रुझान पूरे भारत में 52,000 से अधिक संगठित रिटेल संपर्क बिंदुओं से एकत्रित और संसाधित नकदी के आधार पर रिटेल खरीद का एक व्यापक आर्थिक संकेतक है। यह वित्त वर्ष 2023 की तुलना में वित्त वर्ष 2024 में देखे गए उपभोक्ताओं के व्ययों के रुझान पर एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिसमें क्रिकेट विश्व कप कार्यक्रम, त्योहार और शादी का मौसम का प्रभाव दिखता है। इस विश्लेषण के माध्यम से जनसांख्यिकीय के ज़रिए उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर करीब से नज़र डाला गया है और यह विभिन्न क्षेत्रों में इन-स्टोर और ऑनलाइन रिटेल खरीदारी को मापकर देश में उपभोक्ता व्यवहार का रुझान प्रस्तुत करता है।
बी2सी सेगमेंट में, अप्रैल-सितंबर 2023 की अवधि के दौरान प्रमुख 11 क्षेत्रों के रिटेल खपत में 9.3% की वार्षिक वृद्धि देखी गई। एफएमसीजी और ई-कॉमर्स क्षेत्रों में वित्त वर्ष 24 के दूसरे तिमाही के दौरान क्रमशः 26.2% और 19.4% की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो मुद्रास्फीति में कमी के मध्य इन क्षेत्रों में बढ़ती उपभोक्ता मांग को दर्शाता है। वित्त वर्ष 24 के दूसरे तिमाही में विमानन एवं आतिथ्य क्षेत्रों में क्रमशः 29.7% और 12.8% की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो कि क्रिकेट विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों के कारण यात्रा की बढ़ी मांग को दर्शाता है। आभूषण क्षेत्र में वित्त वर्ष 23 के दूसरे तिमाहीमें 4.6% की गिरावट के विपरीत 7.1% की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो शादी के मौसम के कारण खर्चों का बढ़ना और महामारी के बाद इनकी मांग में उछाल की ओर इशारा करता है। वित्त वर्ष 24 के दूसरे तिमाही में बढ़ती आय, शहरीकरण और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं जैसे कारकों के कारण, बड़े फॉर्मेट वाले रिटेल क्षेत्र में 7.8% की वार्षिक वृद्धि देखी गई।
जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से, मेट्रो शहर, जो वित्त वर्ष 23 के दूसरे तिमाही से वित्त वर्ष 24 के पहले तिमाही तक सबसे तेजी से बढ़े थे, वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में SURU (अर्ध-शहरी एवं ग्रामीण) से आगे निकल गए, जिसमें साल-दर-साल 9.2% की सबसे तेज खपत वृद्धि देखी गई, जो स्वनिर्णयगत व्यय में संवर्धन द्वारा प्रेरित और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रतिकूल परिस्थितियों को इंगित करता है।
सीएमएस इंफो सिस्टम्स में कैश मैनेजमेंट सॉल्यूशंस के अध्यक्ष अनुष राघवन ने कहा, “सीएमएस कैश इंडेक्स™ (सीसीआई) उपभोक्ताओं द्वारा किए गए वाणिज्य लेनदेन को ट्रैक करने के लिए एक बहुत शक्तिशाली संकेतक साबित हुआ है और विभिन्न नीति निर्माताओं द्वारा भी इसका उल्लेख किया गया है। रिटेल खपत में वृद्धि वित्त वर्ष 24 के दूसरी तिमाही में 7.6% सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के समानांतर है, जो मुद्रास्फीति में कमी के कारण बढ़ी है। इन व्यापक आर्थिक संकेतकों से संकेत लेते हुए, हम वित्त वर्ष 24 के तीसरी तिमाही में तगड़ी खपत वृद्धि की उम्मीद करते हैं, खासकर एफएमसीजी, ई-कॉमर्स और विमानन क्षेत्रों में।”
ये रिटेल उपभोग रुझान भारत की रिटेल उपभोग गाथा का समर्थन करने वाले सम्मोहक पैटर्न और रुझानों को उजागर करते हुए उपभोक्ता व्यवहार एवं विकासशील उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हैं।