
नई दिल्ली। देश में महंगाई की दर को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक कई दौर में प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि कर चुका है। इसके बाद से बैंकों ने कर्ज़ की दरों में लगातार बढ़ोतरी की है। अधिकांश बैंकों ने कर्ज की दरों के साथ साथ डिपॉजिट दरों में वृद्धि कर बैंक ग्राहकों को लुभाने की कोशिश भी की है। लेकिन ऐसे बैंकों की संख्या अभी बहुत कम है। दूसरे, जिस अनुपात में कर्ज़ की दरें बढ़ी हैं अथवा प्रमुख दरों में वृद्धि हुई है डिपॉजिट रेट में उस लिहाज से वृद्धि नहीं हुई है। बैंकों की तरफ़ से इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि बैंकिंग सिस्टम में पहले से ही नक़दी की मात्रा पर्याप्त है इसलिए वे ज्यादा डिपॉजिट आकर्षित करके नक़दी को सँभालने की अपनी लागत में वृद्धि करना नहीं चाहते।
इसका अर्थ यह हुआ कि ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद बैंक डिपॉजिट अभी भी निवेश के लिहाज़ से आकर्षक नहीं दिख रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि अधिकांश बैंक अभी भी साढे़ पाँच फीसद से अधिक ब्याज अपने डिपॉजिट पर नहीं दे रहे हैं। कुछ निजी छोटे बैंक इसमें अपवाद हैं जो अधिक ब्याज ऑफ़र कर रहे हैं। जबकि महंगाई की दर अभी भी साढ़े छह फीसद बनी हुई है। यानी बैंक एफ़डी में आप जितना निवेश करते हैं उस पर रिटर्न महंगाई की दर से भी कम मिलेगा। अर्थात् आपकी जमाराशि की क़ीमत एक साल बाद (अगर महंगााई की दर यही बनी रहती है) मूल से कम हो जाएगी। इसे ऐसे समझा जा सकता है। यदि आप पाँच प्रतिशत की ब्याज पर एक साल के लिए एक लाख रुपये की एफ़डी करते हैं तो आपको अवधि समाप्त होने पर एक लाख पाँच हज़ार रुपये की राशि प्राप्त होगी। लेकिन अगर महंगाई की दर छह फीसद से ऊपर बनी रहती है तो आपकी धनराशि की क़ीमत कम हो जाएगी। यानी आज की तारीख़ में जो सामान आप एक लाख रुपये में ख़रीद सकते हैं उसकी क़ीमत एक साल बाद छह फीसद बढ़ जाएगी। तब वही सामान ख़रीदने के लिए आपको एक लाख रुपये छह हज़ार रुपये की आवश्यकता होगी।
ऐसे में यह ज़रूरी है कि आप निवेश के बेहतर विकल्पों का चुनाव करें। यह सही है कि बैंक एफ़डी सुरक्षा और जोखिम के लिहाज़ से आपको आश्वस्त करती है। लेकिन आपकी मेहनत और गाढ़ी कमाई का पैसा व्यर्थ न जाए, इसका ध्यान रखना भी ज़रूरी है। इसलिए निवेश करने से पहले सभी विकल्पों का समझदारी से अध्ययन करना बहुत ज़रूरी है। यही नहीं किसी बेहतर निवेश एक्सपर्ट की सलाह लेना भी बहुत ज़रूरी है।
हालाँकि इस बात को थोड़े बहुत अध्ययन के बाद आप भी आसानी से समझ सकते हैं। निवेश करने का विचार आने के बाद सबसे पहले तो आपको इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि निवेश के किस विकल्प में आपको सर्वाधिक लाभ मिलेगा। इसके लिए आपको रेट ऑफ रिटर्न पर ध्यान देना चाहिए। यानी आपको यह देखना होगा कि पिछले एक साल में किस विकल्प में सबसे ज्यााद रिटर्न मिला है।
जैसा कि हम सभी देख रहे हैं कि शेयर बाज़ार रिटर्न के लिहाज़ से बहुत लाभकारी दिख रहा है। लेकिन इसमें सीधे निवेश करना बेहद जोखिम भरा भी हो सकता है क्योंकि शेयर बाज़ार में सीधे निवेश करने के लिए बहुत अधिक समय और अपडेट रहने की आवश्यकता है। लेकिन बिना अधिक जोखिम उठाये भी शेयर बाज़ार की तेज़ी का लाभ लिया जा सकता है। इसमें म्यूचुअल फंड आपकी मदद करते हैं। आपको केवल म्यूचुअल फंड की सही स्कीम खोज निकालनी है। थोड़े अध्ययन के बाद आप इसमें भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि आजकल मीडिया के ज़रिए इसके लिए तमाम तुलनात्मक अध्ययन उपलब्ध हैं। आपको केवल सबसे अधिक सालाना रिटर्न देने वाला म्यूचुअल फंड चुनना है और उसमें अपनी धनराशि का निवेश करना है। अगर बैंक डिपॉजिट में पाँच-छह फीसद सालाना का रिटर्न मिल रहा है तो म्यूचुअल फंड में आप आसानी से आठ से दस फीसद का रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। इससे न केवल आप महंगाई दर से होने वाले नुकसान की भरपाई कर लेते हैं बल्कि अपने निवेश पर लाभ भी प्राप्त करते हैं।
नितिन प्रधान