पेटीएम ग्राहकों के लिए राहत की खबर

रिजर्व बैंक ने किया स्पष्ट पेटीएम ऐप पर नहीं हुई कार्रवाई

-आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने कहा पेटीएम के साथ अन्य बैंकों का जुड़ना उनका व्यावसायिक फैसला

-पेटीएम ने दिया भरोसा ऐप के संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं

नई दिल्ली। भारी तादाद में पेटीएम ऐप के जरिए डिजिटल लेनदेन करने वाले ग्राहकों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने आज यह स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बैंक की तरफ से की गई कार्रवाई पेटीएम बैंक पर हुई है। पेटीएम ऐप को लेकर रिजर्व बैंक ने कोई कार्रवाई नहीं की है। पेटीएम के पेमेंट एप पर इसका कोई असर नहीं होगा। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा है कि अगर कोई अन्य बैंक पेटीएम के साथ जुड़ना चाहता है तो यह उसका व्यावसायिक फैसला होगा। जो बैंक चाहे वह पेटीएम के साथ मिलकर काम कर सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से डिप्टी गर्वनर स्वामीनाथन जे ने मौद्रिक व ऋण नीति जारी होने के बाद पत्रकारों से कहा, “पेटीएम बैंक के विरुद्ध कार्रवाई हुई है न कि पेटीएम एप के।“ उन्होंने कहा कि पेटीएम ऐप आरबीआई की कार्रवाई से प्रभावित नहीं होगा। रिजर्व बैंक की तरफ से आया यह बयान पेटीएम ऐप इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के कई भ्रम दूर करेगा। पिछले सप्ताह ही रिजर्व बैंक की तरफ से पेटीएम बैंक और डिजिटल वॉलेट पर नए ग्राहक लेने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद से पेटीएम ग्राहकों के बीच यह भ्रम उत्पन्न हो गया था कि इस रोक से वे पेटीएम ऐप का इस्तेमाल भी नहीं कर पाएंगे।

पेटीएम की तरफ से भी स्पष्ट किया जा चुका है कि पेटीएम बैंक पर लगी रोक एप के इस्तेमाल को प्रभावित नहीं करेगी। यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन से लेकर उन सभी सुविधाओं का इस्तेमाल ग्राहक कर सकते हैं जिनमें पेटीएम बैंक की भागीदारी नहीं है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन ने गुरुवार को स्पष्ट भी किया कि यदि कोई अन्य बैंक पेटीएम ऐप के साथ जुड़ना चाहता है तो यह उसका व्यावसायिक निर्णय होगा। रिजर्व बैंक के इस रुख ने पेटीएम के लिए अन्य बैंकों के साथ भागीदारी करने का रास्ता भी खोल दिया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब किसी डिजिटल वॉलेट के सामने ऐसी स्थिति आई है। यस बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से प्रतिबंध लगने के बाद फोनपे को भी इसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा था और उसने भी अन्य बैंकों को अपने प्लेटफार्म पर तुरंत जोड़ लिया था।

पेटीएम के प्रवक्ता ने कहा कि हम अपने ग्राहकों और व्यापारिक भागीदारों को आश्वस्त करते हैं कि पेटीएम ऐप पूरी तरह से चालू रहेगा और हमारी सेवाएं अप्रभावित रहेंगी। पेटीएम मोबाइल भुगतान नवाचार में अग्रणी बना हुआ है, और हम निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंकों के साथ अपनी साझेदारी में तेजी ला रहे हैं। हम अपने मर्चेंट पार्टनर्स को आश्वस्त करते हैं कि पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स और कार्ड मशीनें हमेशा की तरह काम करती रहेंगी। पूरे भारत में निर्बाध भुगतान समाधान प्रदान करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए हमारा समर्पण हमेशा की तरह मजबूत है।

महंगे होते कर्ज के बीच स्मॉल सेविंग डिपॉजिट स्कीम पर ब्याज दर बढ़ी

सीनियर सिटीजंस को भी मिलेगा डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज

नई दिल्ली। कर्ज की बढ़ती दरों के बीच सरकार ने छोटी बचत योजनाओं में धन जमा करने वाले लोगों को थोड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने स्माल सेविंग स्कीम पर ब्याज की दरों में वृद्धि करने का फैसला लिया है। सीनियर सिटीजंस के लिए डिपॉजिट स्कीमों पर ब्याज दरों में वृद्धि का ऐलान किया गया है।

दो साल के टाइम डिपॉजिट  पर ब्याज दर में 0.20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं तीन साल की अवधि वाली जमाओं के लिए ब्याज दर में 0.30 फीसदी का इजाफा हआ है। सीनियर सिटीजन को भी सरकार ने इस फेस्टिव सीजन में तोहफा दिया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेविंग्स स्कीम  पर ब्याज दर को बढ़ाकर 7.6 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा मंथली इनकम अकाउंट स्कीम और किसान विकास पत्र (KVP) पर भी ब्याज दरों को बढ़ाया गया है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए 2 साल के टाइम डिपॉजिट पर ब्याज दर को 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया है। 3 साल के टाइम डिपॉजिट पर ब्याज दर को 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 5.8 फीसदी कर दिया गया है। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम पर ब्याज दर अब 7.4 से बढ़कर 7.6 फीसदी हो जाएगी। वहीं, मंथली इनकम अकाउंट स्कीम पर ब्याज दर 6.6 फीसदी से बढ़कर 6.7 फीसदी हो गई है। इसके अलावा किसान विकास पत्र पर ब्याज दर 6.9 से बढ़कर 7.0 फीसदी हो गई है।

Post office deposits, other small savings account openings at 3-year low

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The number of new savings accounts, time deposits and various other small savings schemes in post offices dropped to a three-year low in FY2020-21, the government said in response to a question in the Lok Sabha on Monday. Provisional data for FY2021-22 till November also shows a continuation in the slowdown.

In total, 4.65 crore small savings accounts were opened in FY2018-19. This dropped to 4.12 crore in FY2019-20 and further to 4.11 crore in FY2020-21. 

Data for FY2021-22 which only includes small savings accounts opened with the post office (and thus excludes banks) shows only 2.33 crore accounts have been opened so far this year. 

The steepest fall over the past three years has been in post office savings account openings. These dropped from 1.18 crore in FY 2018-19 to 72.1 lakh in FY2020-21. Public provident fund (PPF) saw a rise in FY 2019-20 and a drop in FY 2020-21. PPF account openings rose from 11.5 lakh to 27.2 lakh in FY 2019-20 before dropping to 19.6 lakh in FY 2020-21. In FY 2021-22, PPF account openings stood at just 3 lakh.

RBI increases threshold for deposits, other funds of non-financial small businesses by 50% to Rs 7.5 crore

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The existing cap was Rs 5 crore, the central bank said on Thursday, adding the new framework will be effective immediately.

Issuing the revised Basel III framework on liquidity standards — liquidity coverage ratio (LCR), liquidity risk monitoring tools and LCR disclosure standards and net stable funding ratio — for small business customers, the monetary authority said these revisions are aimed at helping banks manage their liquidity risks more effectively by aligning them with the norms as set out by the Basel Committee on Banking Supervision (BCBS).

Accordingly, the cap on deposits and other ‘extensions of funds’ has been increased to Rs 7.5 crore from the present threshold of Rs 5 crore for small businesses when it comes to maintaining the LCR, the regulator said.

The above modification is also applicable to deposits and other ‘extensions of funds’ received from small businesses, the regulator said, adding the new norms are applicable only to commercial banks.

By ‘extensions of funds’ RBI means funds in banks in the form of retail exposures which are generally considered as having similar liquidity risk characteristics to retail accounts, while aggregated funds refer to gross amount of all forms of funds such as deposits, debt securities or similar derivative exposures for which the counter-party is known to be a small business customer and therefore are deemed retail deposits.

All such funds should not exceed Rs 7.5 crore per account, the monetary authority said.

This means that a bank treats such deposits in its internal risk management systems consistently over time and in the same manner as other retail deposits, and that such deposits are not individually managed in a way comparable to larger corporate deposits.