RBI की रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, 6.5% पर बरकरार

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दसवीं बार नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा।

रेपो दर के यथावत रहने का मतलब है कि मकान, वाहन समेत विभिन्न कर्जों पर मासिक किस्त (ईएमआई) में बदलाव की संभावना कम है।

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने पुनर्गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सोमवार को शुरू हुई तीन दिन की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि एमपीसी ने नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय किया है। समिति के छह सदस्यों में से पांच ने नीतिगत दर को यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया।

रेपो वह ब्याज दर है, जिसपर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये इसका उपयोग करता है।

इसके साथ चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति के 4.5 प्रतिशत रहने के अनुमान को भी बरकरार रखा गया है।

NFO : Baroda BNP Pariba म्यूचुअल फंड का बड़ौदा बीएनपी पारिबा निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स फंड

निफ्टी 200 मोमेंटम 30 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करने वाली एक ओपन-एंडेड स्कीम

मुंबई। अगर आप म्‍यूचुअल फंड की किसी इनोवेटिव स्‍कीम में
निवेश करने की तलाश में हैं तो आपके पास अच्छा मौका है। बड़ौदा बीएनपी पारिबा
म्यूचुअल फंड ने अपना न्‍यू फंड ऑफर (NFO) बड़ौदा बीएनपी पारिबा निफ्टी 200 मोमेंटम
30 इंडेक्स फंड लॉन्च किया है। यह न्‍यू फंड ऑफर 25 सितंबर 2024 को खुल रहा है और 9
अक्टूबर 2024 को बंद होगा। यह एक ओपेन एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो निफ्टी 200
मोमेंटम 30 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करेगी। इस स्‍कीम को मोमेंटम इन्वेस्टिंग की ताकत
का लाभ उठाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस स्‍कीम द्वारा निवेश के लिए निफ्टी 200
टोटल रिटर्न इंडेक्स से मोमेंटम के आधार पर टॉप 30 शेयरों का चुनाव किया जाएगा।  इस
तरह से यह निवेशकों को बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए एक स्मार्ट और पैसिव स्‍ट्रैटेजी
प्रदान करता है।
NFO की प्रमुख विशेषताएं:

 यह फंड 30 कंपनियों के पोर्टफोलियो में निवेश के जरिए निफ्टी 200 मोमेंटम 30
इंडेक्स को ट्रैक करेगा, ये 30 स्‍टॉक निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स के ही हिस्सा होंगे।
 इन 30 कंपनियों का चुनाव निफ्टी 200 इंडेक्स से उनके सामान्य मोमेंटम स्कोर के
आधार पर किया जाता है।
 निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स ने अपनी स्थापना के बाद से ही निफ्टी 50 इंडेक्स की
तुलना में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
 अप्रैल 2005 में निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स टीआरआई की शुरुआत में अगर किसी
निवेशक ने इसमें 1 लाख रुपये निवेश किया होगा, तो उसके निवेश की वैल्‍यू बढ़कर
अब 46 लाख रुपये हो गई होगी। जबकि निफ्टी 50 टीआरआई में उसी समय किसी ने
1 लाख रुपये निवेश किया होगा, तो अब उसकी वैल्‍यू बढ़कर 15.5 लाख रुपये हुई

होगी। यानी निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स ने इस दौरान निफ्टी 50 टीआरआई की
तुलना में करीब 3 गुना अधिक रिटर्न दिया है। # नोट : पिछला प्रदर्शन भविष्य में
कायम रह भी सकता है और नहीं भी, वहीं भविष्य में किसी रिटर्न की गारंटी नहीं है।
 यह एनएफओ अवधि 25 सितंबर, 2024 को खुल रहा है और इसमें 9 अक्टूबर, 2024
तक निवेश किया जा सकता है।
बड़ौदा बीएनपी पारिबा निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स फंड निवेशकों को अपने
पोर्टफोलियो में मोमेंटम जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा। फंड की मोमेंटम-बेस्‍ड स्‍ट्रैटेजी का
लक्ष्य अनुकूल परिस्थितियों वाले शेयरों को टारगेट करना है, जिसके पीछे स्‍ट्रैटेजी यह है कि
ये स्‍टॉक पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और वे भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेंगे।
इस फंड का फोकस मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से टॉप 200 कंपनियों पर होगा और
उसमें से बेहतर मोमेंटम वाले 30 शेयरों का चुनाव किया जाएगा। इस फंड का लक्ष्य उन
छोटी कंपनियों में निवेशकों का एक्‍सपोजर कम करना है, जो अधिक अस्थिर और जोखिम
भरी होती हैं। इस स्‍ट्रैटेजी से निवेशकों के साथ जुड़ने वाला जोखिम भी कम हो जाता है।
बड़ौदा बीएनपी पारिबा एएमसी के सीईओ सुरेश सोनी का कहना है कि हमारा बड़ौदा
बीएनपी पारिबा निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स फंड पैसिव इन्वेस्टिंग की कास्‍ट-
एफिशिएंसी (लागत दक्षता) और फैक्‍टर-बेस्‍ड निवेश का लाभ उठाकर बेहतर प्रदर्शन की
क्षमता दोनों की ही सबसे अच्छी पेशकश करना चाहता है। फैक्‍टर इन्वेस्टिंग, जो पैसिव
इन्वेस्टिंग के तहत एक अवधारणा है, मूल रूप से उन फैक्‍टर्स की पहचान करने की कोशिश
करता है, जो स्टॉक के बेहतर प्रदर्शन में योगदान करते हैं। इन फैक्‍टर के एनालिसिस
(विश्लेषण) से संकेत मिलता है कि मोमेंटम फैक्‍टर के प्रदर्शन का ट्रैक रिकॉर्ड, भारत में सबसे
अच्छे प्रदर्शन वाले ट्रैक रिकॉर्ड में से एक है। इस स्‍ट्रैटेजी ने बैक-टेस्टिंग में अच्छे रिजल्‍ट
दिए हैं, साथ ही मोमेंटम स्‍ट्रैटेजी (जैसा कि निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स द्वारा दिखाया
गया है) ने निफ्टी 50 इंडेक्स से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
पिछले 15 साल के आंकड़ों का एनालिसिस  करने से पता चलता है कि निफ्टी 200 मोमेंटम
30 इंडेक्स टीआरआई 22 फीसदी सालाना की सीएजीआर से बढ़ी है, जबकि निफ्टी 50
टीआरआई में 13 फीसदी सालाना ग्रोथ है। (सोर्स: nseindia.com, डाटा 31 अगस्त 2024 तक)।
फैक्टर इन्वेस्टिंग निवेशकों में निवेश को लेकर किसी तरह के कंफ्यूजन को दूर करता है और
निफ्टी 200 मोमेंटम 30 इंडेक्स की नकल कर रूल-बेस्ड इन्वेस्टिंग का पालन करता है।

Baroda BNP पारिबा मल्टीकैप फंड ने हासिल की 2 बड़ी उपलब्धियां

फंड के 21 साल हुए पूरे, एयूएम 2500 करोड़

रुपये के पार

मुंबई। बड़ौदा बीएनपी पारिबा मल्टीकैप फंड ने अपने
21 साल पूरी होने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है. वहीं 21 साल होने पर बड़ौदा
बीएनपी पारिबा मल्टीकैप फंड ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस फंड का
एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम – AUM) 2500 करोड़ रुपये के पार चला गया है।
लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को मिलाकर अपने संतुलित पोर्टफोलियो के
लिए जानी जाने वाली इस स्‍कीम ने शॉर्ट टर्म और मिड टर्म (1 साल और 3 साल) के
लिए अपने बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
अपने लॉन्च के बाद से, बड़ौदा बीएनपी पारिबा मल्टीकैप फंड मजबूत रिटर्न चाहने
वाले निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प रहा है। अगर किसी निवेशक ने योजना
के लॉन्च के समय से सिस्‍टमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (एसआईपी) के माध्यम से
मंथली 10,000 रुपये का निवेश होगा, तो आज उसके निवेश की वैल्‍यू बढ़कर 1.58
करोड़ रुपये से अधिक हो गई होगी। फंड का शार्प रेश्यो 1.11 इसकी मजबूत रिस्क-
एडजस्टेड रिटर्न देने की क्षमता को दिखाता है, जबकि इसका एक से कम बीटा संकेत
करता है कि ये रिटर्न लिमिटेड निगेटिव जोखिम के साथ हासिल किए गए थे। योजना
का प्रदर्शन म्यूचुअल फंड के ब्रांड वादे ‘टुगेदर फॉर मोर’ का प्रमाण है।
बड़ौदा बीएनपी पारिबा मल्टीकैप फंड की बात करें तो यह मल्टी-कैप इंडेक्स यूनिव
का लाभ उठाता है, जो फंड मैनेजर्स को मीडिया, टेक्सटाइल और फॉरेस्ट मैटेरियल्स
सहित कई सेक्टर में निवेश करने की सुविधा प्रदान करता है, जो अक्सर लार्ज-कैप
इंडेक्स से अनुपस्थित होते हैं। यह व्यापक डाइवर्सिफिकेशन फंड को अनूठे ग्रोथ

अवसरों का लाभ उठाने और अलग अलग इकोनॉमिक साइकिल में जोखिमों को कम
करने में सक्षम बनाता है।
यह स्कीम, जिसका लक्ष्य 40-60 शेयरों का एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाए
रखना है, डाइवर्सिफिकेशन के साथ ग्रोथ चाहने वाले निवेशकों, पहली बार एक ही
फंड के माध्यम से अलग अलग मार्केट कैप में निवेश की तलाश करने वाले निवेशकों
और भारत की ग्रोथ स्टोरी में भाग लेने की इच्छा रखने वाले निवेशकों के लिए बेहतर
विकल्प है। इस फंड का प्रबंधन श्री चावला द्वारा फ्लैगशिप प्रोडक्ट के नामित फंड
मैनेजर के रूप में किया जाता है।

पेटीएम ग्राहकों के लिए राहत की खबर

रिजर्व बैंक ने किया स्पष्ट पेटीएम ऐप पर नहीं हुई कार्रवाई

-आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने कहा पेटीएम के साथ अन्य बैंकों का जुड़ना उनका व्यावसायिक फैसला

-पेटीएम ने दिया भरोसा ऐप के संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं

नई दिल्ली। भारी तादाद में पेटीएम ऐप के जरिए डिजिटल लेनदेन करने वाले ग्राहकों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने आज यह स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बैंक की तरफ से की गई कार्रवाई पेटीएम बैंक पर हुई है। पेटीएम ऐप को लेकर रिजर्व बैंक ने कोई कार्रवाई नहीं की है। पेटीएम के पेमेंट एप पर इसका कोई असर नहीं होगा। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा है कि अगर कोई अन्य बैंक पेटीएम के साथ जुड़ना चाहता है तो यह उसका व्यावसायिक फैसला होगा। जो बैंक चाहे वह पेटीएम के साथ मिलकर काम कर सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से डिप्टी गर्वनर स्वामीनाथन जे ने मौद्रिक व ऋण नीति जारी होने के बाद पत्रकारों से कहा, “पेटीएम बैंक के विरुद्ध कार्रवाई हुई है न कि पेटीएम एप के।“ उन्होंने कहा कि पेटीएम ऐप आरबीआई की कार्रवाई से प्रभावित नहीं होगा। रिजर्व बैंक की तरफ से आया यह बयान पेटीएम ऐप इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के कई भ्रम दूर करेगा। पिछले सप्ताह ही रिजर्व बैंक की तरफ से पेटीएम बैंक और डिजिटल वॉलेट पर नए ग्राहक लेने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद से पेटीएम ग्राहकों के बीच यह भ्रम उत्पन्न हो गया था कि इस रोक से वे पेटीएम ऐप का इस्तेमाल भी नहीं कर पाएंगे।

पेटीएम की तरफ से भी स्पष्ट किया जा चुका है कि पेटीएम बैंक पर लगी रोक एप के इस्तेमाल को प्रभावित नहीं करेगी। यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन से लेकर उन सभी सुविधाओं का इस्तेमाल ग्राहक कर सकते हैं जिनमें पेटीएम बैंक की भागीदारी नहीं है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन ने गुरुवार को स्पष्ट भी किया कि यदि कोई अन्य बैंक पेटीएम ऐप के साथ जुड़ना चाहता है तो यह उसका व्यावसायिक निर्णय होगा। रिजर्व बैंक के इस रुख ने पेटीएम के लिए अन्य बैंकों के साथ भागीदारी करने का रास्ता भी खोल दिया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब किसी डिजिटल वॉलेट के सामने ऐसी स्थिति आई है। यस बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से प्रतिबंध लगने के बाद फोनपे को भी इसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा था और उसने भी अन्य बैंकों को अपने प्लेटफार्म पर तुरंत जोड़ लिया था।

पेटीएम के प्रवक्ता ने कहा कि हम अपने ग्राहकों और व्यापारिक भागीदारों को आश्वस्त करते हैं कि पेटीएम ऐप पूरी तरह से चालू रहेगा और हमारी सेवाएं अप्रभावित रहेंगी। पेटीएम मोबाइल भुगतान नवाचार में अग्रणी बना हुआ है, और हम निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंकों के साथ अपनी साझेदारी में तेजी ला रहे हैं। हम अपने मर्चेंट पार्टनर्स को आश्वस्त करते हैं कि पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स और कार्ड मशीनें हमेशा की तरह काम करती रहेंगी। पूरे भारत में निर्बाध भुगतान समाधान प्रदान करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए हमारा समर्पण हमेशा की तरह मजबूत है।

वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में 9.3% की तगड़ी खपत वृद्धि देखी गई: सीएमएस का रिटेल उपभोग रुझान

वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में 11 B2सेक्टरों के वार्षिक विश्लेषण से संगठित रिटेल क्षेत्र के उपभोक्ता व्यवहार में प्रमुख पैटर्न का पता चलता है।

• उच्च सकल घरेलू उत्पाद एवं मुद्रास्फीति में नरमी से त्योहार और शादी के मौसम के कारण वित्त वर्ष 24 के तीसरी तिमाही में रिटेल खपत में वृद्धि होने की उम्मीद है।

मुंबई3 जनवरी2024: सीएमएस इन्फो सिस्टम्स ने बड़े फॉर्मेट वाले रिटेल, आभूषण, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स, आतिथ्य, और विमानन आदि जैसे 11 उपभोक्ता क्षेत्रों के व्यापक विश्लेषण के माध्यम से वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में संगठित रिटेल क्षेत्र में प्रमुख उपभोग रुझानों का खुलासा किया है।

सीएमएस द्वारा रिटेल उपभोग रुझान पूरे भारत में 52,000 से अधिक संगठित रिटेल संपर्क बिंदुओं से एकत्रित और संसाधित नकदी के आधार पर रिटेल खरीद का एक व्यापक आर्थिक संकेतक है। यह वित्त वर्ष 2023 की तुलना में वित्त वर्ष 2024 में देखे गए उपभोक्ताओं के व्ययों के रुझान पर एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिसमें क्रिकेट विश्व कप कार्यक्रम, त्योहार और शादी का मौसम का प्रभाव दिखता है। इस विश्लेषण के माध्यम से जनसांख्यिकीय के ज़रिए उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर करीब से नज़र डाला गया है और यह विभिन्न क्षेत्रों में इन-स्टोर और ऑनलाइन रिटेल खरीदारी को मापकर देश में उपभोक्ता व्यवहार का रुझान प्रस्तुत करता है।

 बी2सी सेगमेंट में, अप्रैल-सितंबर 2023 की अवधि के दौरान प्रमुख 11 क्षेत्रों के रिटेल खपत में 9.3% की वार्षिक वृद्धि देखी गई। एफएमसीजी और ई-कॉमर्स क्षेत्रों में वित्त वर्ष 24 के दूसरे तिमाही के दौरान क्रमशः 26.2% और 19.4% की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो मुद्रास्फीति में कमी के मध्य इन क्षेत्रों में बढ़ती उपभोक्ता मांग को दर्शाता है। वित्त वर्ष 24 के दूसरे तिमाही में विमानन एवं आतिथ्य क्षेत्रों में क्रमशः 29.7% और 12.8% की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो कि क्रिकेट विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों के कारण यात्रा की बढ़ी मांग को दर्शाता है। आभूषण क्षेत्र में वित्त वर्ष 23 के दूसरे तिमाहीमें 4.6% की गिरावट के विपरीत 7.1% की वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो शादी के मौसम के कारण खर्चों का बढ़ना और महामारी के बाद इनकी मांग में उछाल की ओर इशारा करता है। वित्त वर्ष 24 के दूसरे तिमाही में बढ़ती आय, शहरीकरण और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं जैसे कारकों के कारण, बड़े फॉर्मेट वाले रिटेल क्षेत्र में 7.8% की वार्षिक वृद्धि देखी गई।

जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से, मेट्रो शहर, जो वित्त वर्ष 23 के दूसरे तिमाही से वित्त वर्ष 24 के पहले तिमाही तक सबसे तेजी से बढ़े थे, वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही में SURU (अर्ध-शहरी एवं ग्रामीण) से आगे निकल गए, जिसमें साल-दर-साल 9.2% की सबसे तेज खपत वृद्धि देखी गई, जो स्वनिर्णयगत व्यय में संवर्धन द्वारा प्रेरित और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रतिकूल परिस्थितियों को इंगित करता है।

सीएमएस इंफो सिस्टम्स में कैश मैनेजमेंट सॉल्यूशंस के अध्यक्ष अनुष राघवन ने कहा, “सीएमएस कैश इंडेक्स™ (सीसीआई) उपभोक्ताओं द्वारा किए गए वाणिज्य लेनदेन को ट्रैक करने के लिए एक बहुत शक्तिशाली संकेतक साबित हुआ है और विभिन्न नीति निर्माताओं द्वारा भी इसका उल्लेख किया गया है। रिटेल खपत में वृद्धि वित्त वर्ष 24 के दूसरी तिमाही में 7.6% सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के समानांतर है, जो मुद्रास्फीति में कमी के कारण बढ़ी है। इन व्यापक आर्थिक संकेतकों से संकेत लेते हुए, हम वित्त वर्ष 24 के तीसरी तिमाही में तगड़ी खपत वृद्धि की उम्मीद करते हैं, खासकर एफएमसीजी, ई-कॉमर्स और विमानन क्षेत्रों में।”

ये रिटेल उपभोग रुझान भारत की रिटेल उपभोग गाथा का समर्थन करने वाले सम्मोहक पैटर्न और रुझानों को उजागर करते हुए उपभोक्ता व्यवहार एवं विकासशील उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हैं।

Baroda BNP परिबा म्यूचुअल फंड का NFO-छोटे निवेश से बड़ी कमाई का मौका

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Baroda BNP Pariba Multi Asset Fund से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें

• यह  NFO 28 नवंबर, 2022 को निवेश के लिए खुल रहा है और 12 दिसंबर, 2022 को बंद होगा.

• यह फंड इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और गोल्ड ईटीएफ के मिक्‍स में निवेश करता है। इक्विटी में निवेशका उद्देश्य निवेशकों को हाई रिटर्न देते हुए उनकी दौलत या कैपिटल में बढ़ोतरी करना है। फिक्‍स्‍डइनकम विकल्‍पों में निवेश से रेगुलर आय हासिल करने में मदद मिलेगी, वहीं गोल्ड ईटीएफ काउद्देश्य वैश्विक संकट के दौरान सुरक्षा प्रदान करना है।

• फंड जिन एसेट क्लास यानी परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करता है, उनका एक-दूसरे के साथ कमकोरिलेशन होता है। इसके साथ फंड का लक्ष्य एक ऐसा ऑल-राउंडर पोर्टफोलियो बनाना है, जिसमेंहर मार्केट साइकिल में प्रदर्शन करने की क्षमता हो।

• इसके अलावा, एक ही पोर्टफोलियो होने से आप इन परिसंपत्तियों में व्यक्तिगत रूप से निवेश करनेऔर कई पोर्टफोलियो को मैनेज और ट्रैक करने संबंधी परेशानियों से बचते हैं। इस तरह यह फंडआपको एक ही निवेश द्वारा कई एसेट क्लास यानी इक्विटी, फिक्‍स्‍ड इनकम, गोल्‍ड का पाने में मददकरता है। इसका उद्देश्य मार्केट साइकिल में बेहतर जोखिम समायोजित रिटर्न यानी रिस्क एडजस्टेडरिटर्न हासिल करना है।

• इस फंड में कम से कम 5000 रुपये के साथ निवेश करना होगा, जिसके बाद 1 रुपये के मल्‍टीपल मेंनिवेश किया जा सकता है।

मुंबई।: अगर आप निवेश के लिए किसी नए और बेहतर विकल्प की तलाश में हैं तो आपके पास अच्छा मौका है। देश के लीडिंग म्‍यूचुअल फंड हाउस में शामिल बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड ने इक्विटी, डेट और गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने वाली एक ओपन-एंडेड स्कीम, बड़ौदा बीएनपी परिबास मल्टी एसेट फंड लॉन्च किया है। इस फंड का प्रबंधन जितेंद्र श्रीराम (25 साल से अधिक का अनुभव) और विक्रम पमनानी (12 साल से अधिक का अनुभव) द्वारा किया जाएगा। यह निफ्टी 500 टीआरआई के 65 फीसदी + निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्‍स के 20 फीसदी और गोल्ड प्राइस का 15 फीसदी से युक्त एक कस्टमाइज इंडेक्‍स के खिलाफ बेंचमार्क किया जाएगा।
इस स्कीम का उद्देश्य निवेश का 65-80 फीसदी इक्विटी के लिए आवंटन के जरिए लंबी अवधि में कैपिटल ग्रोथ हासिल करना है. वहीं इसके जरिए फिक्‍स्‍ड इनकम और गोल्‍ड ईटीएफ दोनों एसेट क्लास में 10-25 फीसदी, जबकि REITs और INVITs यूनिट्स 10 फीसदी आवंटन किया जाएगा। यह फंड का उद्देश्य इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और गोल्ड ईटीएफ की पावर को संयोजित कर बेहतर रिटर्न हासिल करना है ही, साथ में इसके जरिए एक अलग एसेट एलोकेशन-आधारित पोर्टफोलियो स्‍ट्रैटेजी  प्रदान करता है। इसका उद्देश्य बाजार में तेजी के दौरान ग्रोथ ऑफर करना और गिरावट के दौरान सुरक्षा प्रदान करना है।
बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड के सीईओ सुरेश सोनी ने इस मौके पर कहा कि बड़ौदा बीएनपी परिबा मल्टी एसेट फंड निवेशकों को अलग अलग एसेट क्लास में अच्छी तरह से डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाने का अवसर दे रहा है। यह पहली बार निवेश करने वालों और अनुभवी निवेशकों दोनों के लिए एक अच्छा निवेश विकल्प है, क्योंकि यह कई स्‍ट्रैटेजी में निवेश, ट्रैकिंग और निवेश को बनाए रखने की परेशानी से बचाता है। यह उन निवेशकों के लिए भी बेहतर विकल्प है, जो सोने में आवंटन के साथ एसेट क्लास डायवर्सिफिकेशन और पोर्टफोलियो की तलाश कर रहे हैं।
इस फंड का उद्देश्य मजबूत रिसर्च द्वारा समर्थित एक मल्टी कैप निवेश अप्रोच का पालन करना है, जिसमें अलग अलग सेक्टर के लगभग 45-55 स्टॉक हैं। जब फिक्स्ड इनकम की बात आती है, तो फंड अपेक्षाकृत कम क्रेडिट जोखिमों के साथ बेहतर रिटर्न देने के लिए डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स के हाई क्वालिटी वाले पोर्टफोलियो में निवेश करना चाहता है। फंड गोल्ड ईटीएफ में निवेश के जरिए निवेशकों के पोर्टफोलियो में गोल्ड को भी शामिल करता है।

यह NFO 28 नवंबर, 2022 को खुलेगा और 12 दिसंबर, 2022 को बंद होगा।

बाजार के मौजूदा हालात में निवेश को लेकर लग रहा है डर? ऐसे बनाएं मजबूत पोर्टफोलियो 

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सुरेश सोनी ,  CEO ,  बड़ौदा पी.एन.बी. पारिबा म्यूचु्अल फंड

Bachatmantra Desk

शेयर बाजार में कभी तेजी आ रही है तो कभी गिरावट. साल 2022 में अबतक भले ही बाजार पॉजिटिव हैं, लेकिन अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. इसके पीछे कई तरह के ग्लोबल फैक्‍टर ज्यादा जिम्मेदार हैं. जैसे महंगाई, रट हाइक, मंदी की आशंका और जियो पॉलिटिकल टेंशन. फिलहाल इस बीच निवेशक अपने निवेश को लेकर या तो कनफ्यूज हो रहे हैं या डरे हुए हैं. आखिर मौजूदा हालात में उन्हें कहां निवेश करना चाहिए. इस बारे में हमने बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड  के CEO, सुरेश सोनी से बात की है.


सवाल) बाजार के जो मौजूदा हालात हैं, उस बारे में आप क्या सोचते हैं? भारतीय बाजारों का आउटलुक कैसा दिख रहा है?

जवाब) अभी हम दुनिया भर के बाजारों में में बहुत ज्यादा अस्थिरता देख रहे हैं। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पिछले चार दशक में महंगाई का उच्चतम लेवल  दिख रहा है। जिसकी वजह से केंद्रीय बैंक एग्रेसिव तरीके से ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी करने को मजबूर हो रहे हैं। जिसके चलते मंदी की आशंका बढ़ रही है और साथ ही कैपिटल मार्केट में अस्थिरता का कारण बन रहा है। अमेरिकी डॉलर इंटरेस्ट रेट में तेज बढ़ोतरी से मुद्राओं और उभरते बाजारों पर दबाव पड़ा है।

हालांकि इस दौरान भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत में महंगाई दर उच्च है, लेकिन यह मैनेजबल रही है और अर्थव्यवस्था ने भी लचीलापन दिखाया है। बड़े घरेलू आधार को देखते हुए हमारा मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था प्रत्याशित ग्लोबल मंदी से अपेक्षाकृत कम प्रभावित रह सकती है। विदेशी पूंजी प्रवाह ग्लोबल फैक्‍टर्स के चलते अस्थिर रह सकता है, क्योंकि यह ग्लोबल सेंटीमेंट से जुड़ा है। गनीमत है कि इक्विटी बाजार में घरेलू निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है, बल्कि बढ़ी है।

सवाल) ओवरआल फोलियो के रेश्यो में पैसिव यानी निष्क्रिय फोलियो पिछले दो वित्त वर्ष में लगभग 2 गुना हो गए हैं। क्या आप देखते हैं कि पैसिव फंड्स (इंडेक्स फंड्स) मजबूत हो रहे हैं? क्या आप इस सेगमेंट में निवेश की सलाह देंगे?

जवाब) पैसिव फंड्स इंडस्‍ट्री ने हाल के वर्षों में निवेशकों की भागीदारी में बढ़ोतरी देखी है और यह इंडस्‍ट्री एक्टिव फंडों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि अभी इसका बेस कम है।

पैसिव फंड में बढ़ोतरी काफी हद तक EPFO / अन्य PF ट्रस्टों के साथ-साथ एचएनआई और अन्य संस्थागत निवेशकों द्वारा कुछ हद तक संचालित हुई है। वर्तमान में पैसिव फंड कुल इंडस्‍ट्री एसेट का 15 फीसदी हिस्सा है और हम आने वाले वर्षों में उनके मार्केट शेयर में और बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं।

हमारा मानना है कि पैसिव फंडों की डिमांड मजबूत बनी रहेगी और उम्मीद है कि इंडस्‍ट्री AUM में प्रमुख हिस्सेदारी बनाए रखेंगे। हमारा मानना है कि एक्टिव मैनेजर्स ने भारत में अल्फा बनाया है और अच्छी तरह से मैनेज होने वाले एक्टिव फंड बेहतर प्रदर्शन जारी रख सकते हैं।

फिलहाल पैसिव स्‍पेस में इंटरेस्ट बढ़ रहा है, लेकिन हम अपने एक्टिव फंड बिजनेस में भी मजबूत बढ़ोतरी देख रहे हैं. हम स्पष्ट रूप से टारगेटेड ऑफरिंग यानी लक्षित पेशकशों के साथ पैसिव स्‍पेस में एंट्री करने पर भी विचार कर सकते हैं।

सवाल) क्या आपको लगता है कि भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पिछले कुछ सालों में डेवलप हुआ है? इसमें कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन जो आपने पिछले एक दशक में देखा है?

जवाब) भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों में महत्वपूर्ण ग्रोथ देखने को मिली है। बाजार के विकास और रेगुलेशन के साथ साथ इंडस्‍ट्री में भी साल दर साल ग्रोथ देखने को मिली है।

पिछले कुछ वर्षों में म्‍यूचुअल फंड इंडस्ट्री निवेशकों के बीच अच्छा खासा पॉपुलर हुआ है और निवेश लगातार बढ़ रहा है। रिटेल निवेशक अब संस्थागत निवेशकों यानी इंस्टीट्यूशनल इन्‍वेस्‍टर्स की तुलना में AuM के बड़े हिस्से का योगदान करते हैं। बचत का वित्तीयकरण म्‍यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। हमारा मानना है कि भारतीय निवेशक अब मैच्‍योर हो रहे हैं और बाजार के बारे में उनकी समझ में काफी सुधार हुआ है। यह इस फैक्‍ट से भी साबित होता है कि पिछले 12 महीनों में म्यूचुअल फंड अन्य डीआईआई के साथ बाजारों में नेट इन्‍वेस्‍टर रहे हैं, जबकि FPIs ने भारी मात्रा में पैसा निकाला है।

मंथली बेसिस पर SIP AuM और अकाउंट में बढ़ोतरी इंडस्‍ट्री के लिए एक बड़ा और सपोर्ट देने वाला फैक्‍टर रहा है। यह आम तौर पर लंबी अवधि का निवेश है और 2022 जैसी निगेटिव बाजार स्थितियों में भी लचीला साबित हुआ है।

पिछले दशक में कुछ महत्वपूर्ण रेगुलेटरी चेंजेज निम्न हैं:

 · छोटे शहरों की क्षमता की पहचान करना और छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड को बढ़ावा देने के लिए बी-30 जैसा अनुकूल ढांचा तैयार करना।

· “म्यूचुअल फंड सही है” अभियान द्वारा म्युचुअल फंड के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक इंडस्‍ट्रीवाइड पहल का निर्माण।

· प्रोडक्ट और डिसक्लोजर मानकीकरण निवेशक को इनफॉर्म्ड च्‍वॉइस  चुनने में मदद करता है।


सवाल) कोई शख्‍स जो म्यूचुअल फंड में नया है, उसे किस तरह के फंड में निवेश करना चाहिए?

जवाब) म्यूचुअल फंड में निवेश किसी भी निवेशक के वित्तीय लक्ष्यों, उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक इन्‍वेस्‍टमेंट हॉरिजॉन के साथ-साथ निवेशक की रिस्‍क लेने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए। अधिक जोखिम लेने की क्षमता वाले और/या लंबी अवधि के लक्ष्य वाले निवेशक एसेट के अधिक रेश्‍यो को इक्विटी जैसे एसेट क्लास में निवेश करने का विकल्प चुन सकते हैं, जहां रिस्‍क ज्‍यादा है।

म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों को एसआईपी के जरिए या हाइब्रिड फंड जैसे बैलेंस्ड एडवांटेज फंड या लार्ज कैप डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड में निवेश करने पर विचार करना चाहिए। हालांकि निवेश के पहले अपने स्तर पर एडवाइजर से सलाह लें ताकि उनका पोर्टफोलियो बेहतर बन सके।

सवाल) वर्तमान परिदृश्य में स्मॉल कैप स्पेस में निवेश करते समय किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए. इनमें कितने साल के लिए निवेश करना चाहिए?

जवाब) एक कैटेगरी के रूप में स्मॉल कैप फंड अधिक वोलेटाइल या अस्थिर होते हैं और कभी-कभी इनमें तेज गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि, समय के साथ उनके पास लार्ज कैप की तुलना में अधिक रिटर्न देने की क्षमता होती है, क्योंकि इन कंपनियों की ग्रोथ रेट अधिक हो सकती है। उनमें से कुछ को रीसेट किया जा सकता है।

 हमारा मानना है कि स्मॉल कैप फंडों में निवेश लंबी अवधि के लिए होना चाहिए, मसलन 5 साल से अधिक। ध्यान रखें कि अन्य डायवर्सिफाइड इक्विटी फंडों की तुलना में प्रदर्शन महत्वपूर्ण अवधि के लिए अलग-अलग हो सकता है।

सवाल) आप निवेशकों को किस तरह का निवेश मंत्र देंगे।
 

जवाब) बाजार की अस्थिरता का उपयोग करें। बाजार में जब गिरावट होती है तो आपको आकर्षक वैल्यूएशन पर शेयर मिलते हैं। गिरावट के दौर में बाजार भले ही नीचे आ जाएं, लेकिन वे हमेशा के लिए नीचे नहीं रहते। एक लंबी अवधि के निवेशक के लिए, ये इक्विटी में पैसे लगाने और लंबी अवधि के पैसा बनाने के अवसर की तरह होता है।

· अपना एसेट एलोकेशन तय करें और निवेश में बने रहें। रोज रोज कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर ध्यान न दें।

सवाल) बाजार में अभी अस्थिरता है। मौजूदा और नए निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

जवाब) इक्विटी बाजार लंबी अवधि के लिए आपकी दौलत में इजाफा करते हैं,  लेकिन वे इनमें इस दौरान टर्म में उतार चढ़ाव भी रहता है। इक्विटी निवेश के जरिए कंपाउंडिंग का फायदा पाने के लिए आपको लंबी अवधि तक अपने निवेश को बनाए रखना होगा।
यहां दो सुझाव हैं
अपना एसेट एलोकेशन सही करें। अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के लक्ष्य को देखकर इक्विटी में निवेश करें। इक्विटी निवेश को कम से कम 3-5 साल के लक्ष्‍य के साथ शुरू करें। छोटी अवधि के लिए, आप बैंक डिपॉजिट और डेट फंड पर विचार कर सकते हैं।

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) और सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STPs) का इस्तेमाल करें। इक्विटी फंडों में निवेश करने के लिए ये बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं।


सवाल) अभी आप किन सेक्टर्स को लेकर पॉजिटिव हैं?

 
जवाब) हमारा मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में मजबूत बनी रहेगी, मुख्य रूप से घरेलू खपत और खर्च के कारण। इसलिए, हम डोमेस्टिक ओरिएंटेड सेक्‍टर्स जैसे फाइनेंशियल, कंज्‍यूमर, इंडस्ट्रियल और हेल्‍थकेयर पर ओवरवेट हैं। कमोडिटी की कीमतों में नरमी से भारत को फायदा हो सकता है। हम कैपेक्स साइकिल के रिवाइवल के शुरुआती संकेत भी देख रहे हैं। अंत में, प्रीमियमकरण की लंबी अवधि की कहानी, अंडर पेनिट्रेशन और फेवरेबल जियोग्राफिक्‍स भारत की ग्रोथ स्टोरी  को आगे बढ़ा रही है।

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कैसे हावी रह सकते हैं स्टॉक मार्केट (stock market) के उतार-चढ़ाव पर

SIP कितना बेहतर विकल्प?

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Aashish P Somaiyaa, Executive Director and CEO, WhiteOak Capital Asset Management

(Article Courtsy: NSDL)

जब मैंने अपना करियर शुरू किया, तो सेंसेक्स (Sensex) में 100 अंकों की गिरावट का स्वागत अगली सुबह के अखबारों में “बाजार गिर गया” (market crashed) के साथ किया जाता था। जबकि प्रतिशत के संदर्भ में यह वही होगा जैसा अभी है, लेकिन सेंसेक्स में उछाल को देखते हुए, यह संख्या 100 से 1,000 अंक हो गई है, जिसे “क्रैश” (crash) या “डूब जाना” कहा जाता है।

जो नहीं बदला है वह है अस्थिरता। और ऐसा इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि यह इक्विटी में अंतर्निहित है। इक्विटी मार्केट कभी भी एक लाइन में नहीं चलते हैं। जब बाजार में गिरावट आती है, जैसा कि 2020 की शुरुआत में या हाल ही में अक्टूबर 2021 से जून 2022 तक हुआ, हम इस बारे में लंबी चर्चा कर सकते हैं कि रियर-व्यू मिरर (पिछले निवेश पर परिणाम) कितना बदसूरत दिखता है, लेकिन इक्विटी में निवेश के बारे में नियम शाश्वत हैं।

  1. जब रियर-व्यू मिरर विनाशकारी दिखता है, तब विंडस्क्रीन उज्ज्वल और धूप जैसी दिखने लगती है, भले ही आप इसे उस तरह से न देख पाएं
  2. जो लोग तब निवेश करते हैं जब मौजूदा निवेशों के परिणाम अच्छे दिखते हैं, और जब मौजूदा निवेशों के परिणाम खराब दिखते हैं तो पीछे हट जाते हैं, वे कभी धन नहीं बनाते हैं
  3. धारणा के विपरीत, बुल मार्केट में वेल्थ क्रिएट नहीं होती; धन मंदी के बाजारों में निवेश करके बनाया जाता है जो कि निवेश रिपोर्ट में प्रशंसा के रूप में दिखाई देता है जब मंदड़िये पार्श्व में चले जाते हैं। 
  4. अंत में, भारत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि का पिछले 30 वर्षों का औसत लगभग 12% है, सूचकांक कंपनियों की कॉर्पोरेट आय वृद्धि का 30 वर्षों का औसत लगभग समान है और ऐसा ही सेंसेक्स मूल्य में वृद्धि है। तो अगर पिछले 30 वर्षों में अर्थव्यवस्था और बाजारों की चक्रवृद्धि वृद्धि औसत 12% है, तो आप अपने निवेश पर 12% से अधिक कैसे कमा सकते हैं, यदि आप सिर्फ इंडेक्स खरीद रहे हैं? अंकगणित के लिहाज़ से, यदि आप तब निवेश करते हैं जब हाल का औसत 12% से नीचे है, तो आप लाभ के लिए खड़े होते हैं क्योंकि निकट भविष्य में औसत को 12% के दीर्घकालिक औसत के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए 12% से ऊपर जाना पड़ता है!

लेकिन निवेशक बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं? मैं इसे एक निवेशक के साथ काम करने के अपने व्यक्तिगत अनुभव के साथ साझा करता हूं, इसे केस स्टडी के रूप में लें।

एक निवेशक था जिसने मार्च 2015 में कहीं निवेश किया था। उस वक्त निफ्टी 9,000 के करीब था और फरवरी 2020 के अंत तक जब पांच साल पूरे हो गए तो निवेशक को एक बड़े और मिडकैप म्यूचुअल फंड में लगभग 12% सीएजीआर का रिटर्न मिला था। निफ्टी 500 टीआरआई इंडेक्स लाइक टू लाइक बेसिस से करीब 4% सीएजीआर आगे है। जब इस निवेशक ने अप्रैल 2020 की शुरुआत में मुझसे बात की, तो जाहिर तौर पर उसने फरवरी 2020 की स्थिति की परवाह नहीं की। वह काफी परेशान थी क्योंकि पांच साल का सीएजीआर 4% था। आखिर लंबी अवधि क्या है और अगर रिटर्न पांच साल बाद एफडी की दरों से कम है तो निवेश का क्या फायदा? उसने फैसला किया कि वह निवेश से बाहर निकलना चाहती है। एक इक्विटी निवेश के भाग्य का निर्धारण करने पर जोर देना और बाजार में गिरावट के ठीक बाद उससे तरलता की मांग करना आपके बॉस या एचआर मैनेजर की तरह काम पर आपके सबसे खराब दिन पर आपके वार्षिक मूल्यांकन को ठीक करने पर जोर देने जैसा है। यदि इरादा केवल आपको गलती करते हुए पकड़ना है और निष्कर्ष निकालना है तो यह ठीक है लेकिन यदि इरादा निवेश को निवेश की तरह व्यवहार करना है, चाहे वह आपका कर्मचारी या आपका म्यूचुअल फंड हो, तो मामलों का संचालन करने का एक अलग तरीका है।

वापस निवेशक के साथ अपने अनुभव पर लौटते हैं। हमने उन्हें विभिन्न तिथियों पर ऐतिहासिक फ़रवरी 2020 के पोर्टफोलियो मूल्यों का हवाला दिया और समझाया कि किसी किसी ने तो लगभग 12% चक्रवृद्धि रिटर्न हासिल किया है। मार्च 2020 के अंत तक सब कुछ बदल गया। कुछ फर्क नहीं पड़ा कि कौन कितना रिटर्न प्राप्त कर रहा था और उसके पास कितनी होल्डिंग थी। सब कुछ ढह गया; 35-40% की गिरावट आई थी। अंकगणितीय रूप से पूरे पांच साल के CAGR में 7-8% की गिरावट आई है। वह लगातार नाखुश रही और अगले कुछ महीनों तक हमें उनसे जुड़े रहना पड़ा और एक अनुचित मोड़ पर छुटकारे से बचने के प्रयास करने पड़े। अंततः, निवेशक जीत गया, और उसने नवंबर 2020 की शुरुआत में रिडीम किया जब निफ्टी ने जनवरी-फरवरी 2020 के उच्चतम स्तर को 12,000 के आसपास पार कर लिया। रिटर्न 4% से बढ़कर 10% CAGR हो गया था। अब यह सर्वविदित है कि यदि निवेशक ने कुछ और सप्ताह या 2020 के अंत तक भी इंतजार किया होता, तो एक वर्ष का पांच और तीन चौथाई (पांच साल के बजाय) सीएजीआर पहले के 12% से अधिक होता। और अगर उसने आज तक इंतजार किया होता, तो वह इक्विटी में निवेश करने की प्रबल प्रशंसक होती।

क्या सीख मिली?

  1. इक्विटी की अवधारणा में विश्वास और दृढ़ विश्वास को बाज़ार में गिरावट के दौरान प्रदर्शित करने की आवश्यकता है न कि तब जब बाज़ार अपने चरम पर हो। कोई भी अपने बाज़ार में अपने विश्वास का प्रदर्शन तब कैसे कर सकता है जब निफ्टी अपने चरम पर हो। इक्विटी में निवेश की अवधारणा पर विश्वास प्रदर्शित करने की आवश्यकता तब है जब निफ्टी 40% गिर जाता है और 15 दिनों में 7,500 पर पहुंच जाता है, जैसा कि मार्च 2020 में हुआ था। जब पैसा एक साल में दोगुना हो जाता है, तब सबमें विश्वास और आस्था पैदा हो जाती है। लेकिन पैसा आधा रह जाने पर आप क्या करते हैं, इक्विटी बाज़ार में अंततः यही देखा जाता है।

2. इक्विटी रिटर्न नॉन-लीनियर और एकमुश्त होते हैं। 5 साल में जो बनाया गया था वह कुछ ही हफ्तों में नष्ट हो सकता है और जो हफ्तों में नष्ट हो सकता है उसे कम समय में भी वापस पाया जा सकता है। क्या 3-6-9 महीने के व्यवधान से कंपनियों ने अपने बाजार मूल्य का 50-60-70% खोया? बुद्धिमान निवेशक वह है जो बाजार के तर्कहीन मिजाज का फायदा उठाने के बजाय उसका पक्ष लेता है। “जब दूसरे डरे हुए हों तो लालची बनें, जब दूसरे लालची हों तो डरें”, यह सिर्फ़ बाज़ार से जुड़ी एक कहावत नहीं है। और निवेश की अवधि कोई पत्थर की लकीर नहीं है, कुछ दिन, सप्ताह और महीने आगे या पीछे असंगत प्रभाव डाल सकते हैं।

3. निष्कर्ष पर पहुंचने से बचें। प्रसिद्ध अमेरिकी उपन्यासकार, एफ स्कॉट फिट्जगेराल्ड ने कहा, “बुद्धि की असली परीक्षा एक ही समय में दो विरोधी विचारों को दिमाग में रखने और फिर भी कार्य करने की क्षमता को बनाए रखने की क्षमता में है”। एक अन्य प्रसिद्ध अमेरिकी उपन्यासकार जैक लंदन ने कहा, “जीवन हमेशा अच्छे पत्तों को हाथ में रख कर खेलने जैसा नहीं है, लेकिन कभी-कभी, ख़राब पत्तों से भी अच्छा खेला जा सकता है “। जब चीजें अपेक्षित रूप से काम नहीं करती हैं, तो फिर से आने और फिर से कैलिब्रेट करने के बजाय, हम इंसान समापन और निष्कर्ष के लिए तरसते हैं। इक्विटी निवेश यात्रा में काला बनाम सफेद, सही बनाम गलत, अच्छा बनाम बुरा जैसा कुछ नहीं है; केवल संदर्भ और परिप्रेक्ष्य है। किसी को भी निश्चित निष्कर्ष निकालने से दूर रहने की जरूरत है क्योंकि काम में कई तरह की संभावनाएं निकलती हैं।

4. इक्विटी आशावादियों के लिए हैं। कुछ ऐसा जिसके लिए कोई आर्थिक विश्लेषण का मॉडल नहीं हो सकता; जब मानव अपने जीवन और आजीविका के लिए महीनों तक बंद रहने के खतरे का अनुभव करता है; लंबे समय तक बना रहने वाला भय और दमन अंततः भय को दूर करने, प्रतिशोध के साथ वापस उछाल, पुनर्निर्माण, और जीवन को पुनः प्राप्त करने के लिए मनुष्य को तैयार करता है? अगर कोई आम तौर पर मानता है कि इंसान, और कॉरपोरेट्स या इंसानों द्वारा चलाए जाने वाले व्यवसाय अगले डायनासोर हैं, तो इक्विटी आपके लिए नहीं है।

5. मैक्रोइकॉनॉमिक्स की भविष्यवाणी करना मुश्किल ही नहीं, असंभव भी है। मैक्रोज़ की भविष्यवाणी करते हुए इक्विटी में निवेश करना सही नहीं है। यह आमतौर पर अराजक होता है।

6. प्रत्येक स्थिति के लिए हमेशा तैयार रहें। यह कभी न मानें कि अच्छा समय हमेशा के लिए रहेगा लेकिन बुरे समय पर भी यही तर्क लागू करें। जब चलन अच्छा हो और आप अपनी अपेक्षा से अधिक प्राप्त करते हैं, तो इसे भविष्य में दूर तक न खींचे बल्किअलग से कुछ पैसे निकालें। जब चीजें खराब हो रही हों तो उसे भी अधिक विस्तार न दें और कुछ सस्ता ख़रीदने की कोशिश करें। मार्च 2020 में निवेशकों की हरकतें इस तरह थीं जैसे अभी सब कुछ ख़त्म हो जाने वाला हो। 

मैं कुछ और सीख साझा करता हूं…

विंडस्क्रीन वाइपर आपको निवेश के व्यवहार के बारे में क्या सिखाते हैं?

यह ध्यान देने योग्य है कि जहां शेयर बाजार मुंबई से बाहर स्थित हैं, वहीं मुंबई भी संपन्न या शापित है जैसा कि बहुत भारी वर्षा के समय हो सकता है। नतीजतन, मुंबईकर शेयर बाजार सूचकांक के बेतहाशा उतार-चढ़ाव में फंस गए हैं और भारी बारिश और जल-जमाव के बीच घंटों ट्रैफिक में बैठे रहते हैं।

कई साल पहले, 2002-03 में दक्षिण मुंबई के उपनगरीय इलाके में कार्यालय के सहयोगियों के साथ बरसात की एक शाम की यात्रा पर, बातचीत बाजारों में सामान्य उदासीनता, निवेशक भावना और संबद्ध निवेशक मनोविज्ञान पर प्रभाव की ओर मुड़ गई।

कुछ साल पहले सामान्य तौर पर इक्विटी फंड और खासतौर पर टेक्नोलॉजी फंड खरीदने की होड़ मची हुई थी। 1999 के अंत में 2000 की शुरुआत में एक प्रशिक्षु के रूप में मैंने खुद एक टेक्नोलॉजी फंड के शुभारंभ के लिए एक कार्यक्रम देखा था जहाँ प्रजेंटेशन के दौरान प्रोजेक्टर ही नहीं चला। आज भी अधिकांश निवेशक ऐसी ही आधी अधूरी जानकारी के आधार पर निवेश करते हैं। मुंबई के नजदीक एक और शहर में, एक फंड ने स्थानीय संग्रह खाते भी नहीं खोले थे फिर भी निवेशकों ने डिमांड ड्राफ्ट खरीदने का फैसला किया और अपनी जेब से अतिरिक्त धनराशि खर्च करके निवेश करने का फ़ैसला लिया। दृढ़ विश्वास का स्तर ऐसा था कि बेचने के प्रयास की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं थी। यह सर्वविदित है कि टेक्नोलॉजी में किये गये  निवेश पर अंततः रिटर्न उत्पन्न करने में 10 साल लग गए – और कोई उस अनुभव को “वक़्त हर ज़ख्म को भर देता है” प्रकार के सकारात्मक उदाहरण के रूप में उपयोग कर सकता है या कोई उस अनुभव को “आज एक दुआ और माँग लो, आज एक आंसू और पी लो, आज एक ज़िंदगी और जी लो क्या पता कल हो न हो” टाइप नकारात्मक उदाहरण के रूप में उपयोग कर सकता है। 

और 2002-03 में हम ऐसी स्थिति में थे, जहां आम धारणा थी कि दुनिया खत्म हो रही है और कोई “कल” ​​(भविष्य) नहीं है। विश्वास इतने बेतहाशा तरीक़े से कैसे डावाँडोल हो सकता है? हम बस व्यवहार के बारे में चर्चा कर रहे थे और बारिश की बौछार ने कार चला रहे मेरे दोस्त को विंडस्क्रीन वाइपर चालू करने की वजह पैदा कर दी।

तब से, मैं निवेशकों को विंडस्क्रीन वाइपर की तरह व्यवहार नहीं करने के लिए कह रहा हूं। जब बारिश तो पूरी विंडस्क्रीन को गीला कर देती है, लेकिन वाइपर बाएं से दाएं और पीछे अपनी तरह के क्वार्टर सर्कुलर क्रॉस ब्रीड अण्डाकार तरह के रास्ते में आ जाते हैं। लेकिन ऐसा कोई क्षण नहीं होता है जब ड्राइवर के लिए पूरी तरह से स्पष्ट दृष्टि के साथ स्क्रीन को पोंछकर सुखाया जाता हो। जब वाइपर अपने एक छोर पर होता है, तो पानी स्पष्ट रूप से दूसरे छोर को गीला कर देता है और जब तक वाइपर उस छोर पर वापस आता है, तब तक पहला छोर फिर से गीला हो जाता है। पानी बरसता रहता है और वाइपर एक सिरे से दूसरे सिरे तक बिना थके चलते रहते हैं; पानी और चालक की दया पर।

जब भी मैं बाजार पर कोई टिप्पणी सुनता हूँ तो बाजार सहभागियों और निवेशकों का व्यवहार काफी हद तक इस वाइपर की तरह दिखाई देता है। इक्विटी ने निगेटिव रिटर्न दिया है तो चलिए पैसे को कर्ज में डालते हैं। एक्टिव फंड्स ने अंडरपरफॉर्म किया है तो आइए इंडेक्स की तरफ, और अगर स्मॉल व मिडकैप में नुकसान हुआ है तो चलिए लार्ज कैप खरीदते हैं।

वाइपर मत बनो। किसी चीज के आपके खिलाफ जाने के कारणों का पता लगाएं, यह कितने समय से है और आपके खिलाफ काम करने की संभावना है, कारणों को समझें और फिर तय करें कि क्या यह वापस आने और दोगुना होने का समय है या बस आराम से रहें या वापस न आएं, दूर रहें या खुद को बाहर कर लें ।

जिस तरह वाइपर के कार्य का एक चक्र होता है, उसी तरह शेयर बाजार भी चक्रीय होते हैं – परिसंपत्ति वर्ग, मार्केट कैप, फंड प्रवाह और मूल्य, दर्शन और अन्य जैसी निवेश शैली। लेकिन आपका उद्देश्य लंबी अवधि में धन का सृजन करना है, न कि विंडस्क्रीन पर तत्परता से पानी पोंछना; कहीं ऐसा न हो कि असल उद्देश्य ही पीछे रह जाए।

निवेश का स्प्रिंग लिफ्ट और लोकल ट्रेनों के साथ क्या लेना-देना है?

 मैं अपनी कुछ टिप्पणियों को प्रस्तुत करना चाहता हूं और उन्हें आविष्कार कहने का साहस करता हूं। मैंने यह बार-बार देखा है; साइन अप करते समय निवेशक लंबी अवधि के निवेशक होते हैं, लेकिन अगर रिटर्न नकारात्मक हो जाता है तो लंबी अवधि खिड़की से बाहर हो जाती है। इस तरह की प्रतिक्रिया का क्या कारण है? यह स्पष्ट है कि एक निवेशक के रूप में (यहां तक ​​कि मैं भी) हममें से कोई भी अपने पोर्टफोलियो में नकारात्मक नहीं देखना चाहता क्योंकि नकारात्मक रिटर्न हमें खो जाने का अहसास देता है और यह निराशाजनक है, हमारी उम्मीदों पर भारी गिरावट आई है।

मैं एक सरल उदाहरण लेता हूं। यदि किसी ने रु.100/- का निवेश किया है और अब उनका मूल्य 20% प्रतिशत नीचे यानी 80 रुपये हैं। भावना यह है कि 20% खो दिया है और डर यह है कि यह कभी वापस नहीं आएगा। यह कल्पना करने के समान है कि कुछ भौतिक वस्तुएं हैं जिनके पास कोई है और उनमें से एक खो गया है इसलिए इसका 20% चला गया है और वह 20% कभी वापस नहीं आएगा। इसके अलावा, कुछ अंकगणितीय रूप से चतुर लोग हैं जो निवेशकों को संख्याओं के बारे में बताकर डराते हैं जैसे; अगर 100 80 हो जाता है, तो यह 20% नीचे है लेकिन 80 के लिए 100 बनने के लिए अब आपको 25% ऊपर की आवश्यकता है! यह कैसे होगा?

यह वह जगह है जहाँ सही दृश्य महत्वपूर्ण है। यदि आपके पास अंतर्निहित कंपनियों के साथ एक इक्विटी पोर्टफोलियो है जो मुनाफा पैदा कर रही है तो यह दृश्य वसंत का है।

15-20 वर्षों की लंबी अवधि में, निफ्टी मिडकैप 100 ने किसी भी एक साल की होल्डिंग अवधि के लिए निफ्टी 50 के ऊपर औसतन 4% का औसत दिया है। वर्तमान में, इसे लिखते समय, मैं देख सकता हूं कि पिछले एक साल से निफ्टी मिडकैप 100 ने +4% तो भूल जाइए, बल्कि निफ्टी 50 की तुलना में -16% डिलीवर किया है। एक पेंडुलम झूलने की कल्पना करें, जहां मध्य बिंदु +4 है और वर्तमान में पेंडुलम -16 की स्थिति में है, आप पेंडुलम से क्या करने की उम्मीद करेंगे? शायद थोड़ा और आगे झूले? लेकिन अंततः क्या ऐसा होता है? या तो निफ्टी 50 में नीचे की तरफ़ करेक्शन होता है या निफ्टी मिडकैप 100 में ऊपर की ओर करेक्शन होगा। कुंजी यह है कि दोनों को “करेक्शन” कहा जाएगा। आप पेंडुलम पर कहाँ रहना चाहेंगे? आप अपने स्मॉल और मिडकैप पोर्टफोलियो के साथ बेहतर स्थिति में हैं।

अस्थिरता से निपटने और इक्विटी के माध्यम से धन का निर्माण करने का सबसे प्रभावी तरीका है, जो अब एक काफी लोकप्रिय मार्ग है जिसे व्यवस्थित निवेश योजना या एसआईपी कहा जाता है। वास्तव में, हमने व्हाइटऑक में अपने मिड-कैप फंड में केवल एसआईपी आधारित निवेश लेने का फैसला किया है। अप्रैल, 2005 से जुलाई, 2022 की अवधि में हमने जो शोध किया, उससे पता चलता है कि स्मॉल और मिड कैप स्पेस में एसआईपी निवेश, मुश्किल अवधि के दौरान भी उचित रिटर्न देने में सक्षम थे, जबकि एकमुश्त निवेश सपाट रहा।

इस 17 साल की अवधि के दौरान, नौ चुनौतीपूर्ण वर्ष थे, जहां निवेशकों ने धैर्य खो दिया होगा क्योंकि उनका एकमुश्त निवेश सपाट रहा होगा। हालांकि, अगर उन्होंने एसआईपी का रास्ता चुना होता, तो इस अवधि के दौरान भी उन्हें अच्छा रिटर्न मिलता।

(हिंदी अनुवाद: Bachatmantra desk)

Paint makers spared from demand slowdown as raw material prices rise, says Indigo Paints CMD Hemant Jalan

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Although packaged consumer goods companies have experienced a slowdown in consumption for a few quarters, the trend has not hurt demand in the paints industry, according to Hemant Jalan, Chairman and Managing Director of Indigo Paints.

“The consumers have taken it in their stride, at least as far as paint consumption is concerned,” Jalan said in an episode of Life After Listing, a Moneycontrol series that focuses on the key changes for a company’s management and founders after their company goes public.

Jalan warned that if prices of raw materials continue to climb, it could start impacting demand for paints.

“If inflation continues to be at a high level in the next one year or something, at some point in time, it will start affecting demand. We are hoping it won’t happen,” he said.

Jalan said government and Reserve Bank of India (RBI) intervention should keep inflation in check

Ahluwalia Contracts share price rises 10% on Rs 150-crore order

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Ahluwalia Contracts India share price rose 10 percent in the morning session on July 12 after the company announced receiving a construction order for Amity Campus Bengaluru.

Ahluwalia Contracts (India) Limited has secured the new order for construction work of Amity Campus Bengaluru aggregating to around Rs 150 crore from Ritnand Salved Education Foundation, the company said in a release.

The total order inflow during the FY 2022-23 now stands at Rs 863 crore, the company said.

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At 10.40 am, Ahluwalia Contracts India was quoting at Rs 451.20, up Rs 36.60, or 8.83 percent on the BSE.The share touched a 52-week high of Rs 563.50 on April 11, 2022 and a 52-week low of Rs 339.80 on August 10, 2021. It is trading 19.93 percent below its 52-week high and 32.78 percent above its 52-week low.